Sunday, February 20, 2011

जन्नत-ऐ-जिन्दगी।।।।।

हमारे लिए भी खुॅदा ने कुॅछ लिखा होगा,

किसी परी को इन्सान सा सजाया होगा।

ख्वाब सारे पुरे होगे तुमसे,

हमे भी मिलेगी जन्नत-ऐ-जिन्दगी।

बैठे है हम इन्तजार मे उसके,

जिसका प्यार का जादू फैलेगा हमपे।

जो सजाये थे हमने सपने,

पुरे होगे तुम्हारे मिलने से।

हमारे लिए भी खुॅदा ने कुॅछ लिखा होगा,

किसी परी को इन्सान सा सजाया होगा।

ख्वाब सारे पुरे होगे तुमसे,

हमे भी मिलेगी जन्नत-ऐ-जिन्दगी।

जश्-ने बहारा के लिए मै क्या करू।।।।।

जश्-ने बहारा भी कम  शब्द हो,

ऐसे हुस्न की तारीफ मै क्या करू,

जिसने अपना बनाके नवाजा हमे,

उसके ऐहसान के बदले मै क्या करू,

जिन्दगी भर  साथ निभाऊगा,

इस कसम के  सिवा मै क्या दू।

जो भी हसरते है पुरी करँगा,

इस वादे के अलावा और मै क्या दूॅ।