Wednesday, June 27, 2012

हमारे ख्वाब...

रात को मिलने का वादा करके,
जिंदगी से ही विदा हो गये,
कितने ख्वाब सजाये थे हमने,
जल कर सारे ही राख हो गये|

कहते थे सभी, ना करना तेरा ऐतबार कभी,
पर दिल की सुनके हम तुमपे फ़ना हो गये,
प्यार कह कर क्या रिश्ता निभाया हमेशा,
खिलौना बनाके बस प्यार से खेला हमेशा|   

कितने ख्वाब सजाये थे हमने,
जल कर सारे ही राख हो गये|

ना गम है ना शिकवा अपने को खोने का हमे,
पर तुम्हारे जाने का दर्द हम सह ना सके,
तेरे ना होने का इतना सा हुआ है असर,
जी रहे है हम अब बिना अपनी ज़िन्दगी के|

कितने ख्वाब सजाये थे हमने,
जल कर सारे ही राख हो गये|
सारे हमारे ख्वाब, सारे सपने,
तभाह हो गये, तभाह हो गये|